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Humanity

हे! नये साल

in poems

हे! नए साल, तू मुझे बता, क्या बात नयी होगी तुझमें ? क्या प्रात नयी होगी तुझमें ? या घात नयी होगी तुझमें ? क्या नए साल में, भूखों को तू रोटी दिलवाएगा ? या वृद्धों के आश्रम में तू, उनका बेटा लौटाएगा? सारी दुनिया जो जूझ रही, युद्धों को तू रुकवायेगा? या अनाचार की पीड़ा से, तू…

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मेरा गट्टू

in poems

मेरा है गट्टू खरगोश, देता है मन को परितोष , प्यार जताता, खुशी दिखाता, जब आती हूं ,घर को लौट, कान झटक और मटक मटक, जब चलता है तो लगता है , नन्हा सा कोई बच्चा यूं ही , मचल मचल कर चलता है , सुबह सवेरे सही समय पर, आकर मुझे जगाता है, जैसे…

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आस

in poems

घनघोर अमा में आस की, अन्तिम किरण अवशेष है, डूबती ही जा रही मानवता, आकण्ठ भ्रष्टाचार में, फिर भी तट पर उम्मीद का, नाविक अकेला शेष है।   पुरज़ोर ग़र प्रयास हो, इन्सानियत की बात हो, सत्य ही पर अड़ सके, भ्रष्ट हो तो लड़ सके, हर जुर्म का इंसाफ होगा, तब स्वर्णिम प्रभात होगा।

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मानवता

in poems

निज सुखो की मरीचिका में, खो न जाना, जीवन बदलता है यहाँ, ये भूल न जाना, फूल है जीवन में ग़र, तो शूल भी है, चूर मत हो गर्व में, क्योंकि यहाँ पर धूल भी है, धूसरित हो जाएँगी, वो गर्व की आँधियाँ नशीली, हौसला दे तू उन्हें बढ़कर, जिनकी हुई है आँखे गीली  ।

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पिता की सीख

in poems

जब जन्म लिया इन्सां बन कर, इंसानों जैसे जी तो लो, कुछ दुःख के काँटें कम कर लो, कुछ सुख के फूल खिला तो लो, किसका ऐसा जीवन होगा, जिससे कोई न भूल हुई, जीवन पथ पर चलते चलते, पथ में कोई न शूल हुई, काँटों से ही तो सीखा है, संभलना और संवर जाना,…

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जीवन संवाद

in poems

चलो आज फिर काव्य लिखें, जीवन का संभाव्य लिखें, चारो ओर बिखरे जीवन पर, फिर थोड़ा संवाद लिखें, जीवन जीतना गहरा है, उतना ही तो पहरा है, मुक्तिबोध के कुछ छन्दों का, फिर थोड़ा अनुवाद लिखे, युवा मन पर ग्रंथ लिखें, अनुशासन प्रबन्ध लिखें, व्याकुल मन की बेचैनी पर, प्रेम का अनुबंध लिखें, नए सिरे…

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जीवन का सार

in poems

हम रोज़ बढ़ते हैं, एक कदम और, अपनी मृत्यु की ओर, फिर क्यों मचा हुआ है, अनर्गल बातों का शोर, दिव्यता की अनुभूति हो, या करुणा का सार, इनके लिए खोलें, हम हृदय के द्वार, जीवन को न बनाये, अनंत लालसाओं का कारागार, मिटने के पहले जीवन, जीने की ले लें हम दीक्षा, वर्ना नष्ट…

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एहसास

in poems

एक गीत… खुद पे लिखूँ, दिल करता है बहुत, इन दिनों, खुद से खो जाने का, खतरा है बहुत, जिन्हें देखा, जिन्हें परखा, उन्हें चाहा है बहुत, बात इतनी सी है, प्यार उन्हें अखरा है बहुत, जिनके आने तक, नींद ने न दी दस्तक, उन्हें शिकायत है कि, उन पर मेरी आँखों का, पहरा है…

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यादें

in poems

यूं ही बैठे हुए गुज़रा ज़माना याद आया, क्या होता है जिंदगी का स्वाद याद आया, यादों का सफर चलचित्र सा चलता ही गया, तारों को देख, अमावस का गहराना याद आया, समय की धार में जो जाने कहां खो गया, दिल के टुकड़ों में जो अपनी परछाई दे गया, जाते-जाते जो आंखों को पानी…

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