Monthly archive

December 2018

इंतजार में…!

in poems

जा रहा है दिसंबर, ये साल छोड़कर, कि अगले वर्ष आएगा, फिर ठिठुरन ओढ़कर, हर वर्ष की तरह ही, यह वर्ष भी गया, लेकिन इस वर्ष का, अनुभव बहुत नया। कुछ फुर्सत के पल रहे, कुछ ख्वाहिशों के दौर, ज्यों आम के पेड़ों पर , मंजरियों का बौर, जीवन के अनुभवों से, सीख जो मिली,…

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प्रेमाग्रह

in poems

इक मोहक सी मुस्कान  लिए, मन में कुछ कुछ अरमान लिए, बोली आकर कुछ छूट गया, उत्साहित मन कुछ टूट गया, मेरे गुरु, शिक्षक, पथदर्शक, इस बाल दिवस पर अपने मुख से, कुछ अपने छंद कहो न ! इस प्रेमाग्रह से चकित हुई, थोड़ी थोड़ी पुलकित भी हुई, फिर उत्साहित हो बोल दिया, दिल का…

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हे! नये साल

in poems

हे! नए साल, तू मुझे बता, क्या बात नयी होगी तुझमें ? क्या प्रात नयी होगी तुझमें ? या घात नयी होगी तुझमें ? क्या नए साल में, भूखों को तू रोटी दिलवाएगा ? या वृद्धों के आश्रम में तू, उनका बेटा लौटाएगा? सारी दुनिया जो जूझ रही, युद्धों को तू रुकवायेगा? या अनाचार की पीड़ा से, तू…

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अनकही सी बातें

in poems

कुछ अनकही सी बातें, जो कह रही हूं तुमसे, कम को अधिक समझना, ग़र हो सके जो तुमसे। तेरी बात में था मरहम, वो भी था इक ज़माना, अब काम का बवंडर, है व्यस्तता बहाना। प्रश्नो का है समंदर, और दर्द मेरे अंदर, बहने को है आकुल, ये सोच के हूं व्याकुल। परवाह तो है…

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मेरा गट्टू

in poems

मेरा है गट्टू खरगोश, देता है मन को परितोष , प्यार जताता, खुशी दिखाता, जब आती हूं ,घर को लौट, कान झटक और मटक मटक, जब चलता है तो लगता है , नन्हा सा कोई बच्चा यूं ही , मचल मचल कर चलता है , सुबह सवेरे सही समय पर, आकर मुझे जगाता है, जैसे…

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गुरु शिष्य संवाद

in Stories

१२ वर्ष तक गुरुकुल  में रह कर शिक्षा प्राप्त करने के बाद शिष्य के जब घर जाने का समय आया,तब शिष्य ने गुरुजी से पूछा,कि गुरुदेव कृपया सांसारिक जीवन को स्वर्ग जैसा सुखद बनाने का उपाय तो बताएं,ताकि जीवन में कष्ट का आगमन न होने पाएं। गुरु ने कहा,कि तुम जीवन के प्राकृतिक नियमों के…

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आस

in poems

घनघोर अमा में आस की, अन्तिम किरण अवशेष है, डूबती ही जा रही मानवता, आकण्ठ भ्रष्टाचार में, फिर भी तट पर उम्मीद का, नाविक अकेला शेष है।   पुरज़ोर ग़र प्रयास हो, इन्सानियत की बात हो, सत्य ही पर अड़ सके, भ्रष्ट हो तो लड़ सके, हर जुर्म का इंसाफ होगा, तब स्वर्णिम प्रभात होगा।

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