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Vandana Rai

Vandana Rai has 82 articles published.

पिताजी के अंग्रेजी, उर्दू के कुहासे के बीच, मैंने अपनी माँँ के लोकगीतों को ही अधिक आत्मसात किया। उसी लोक संगीत की समझ ने मेरे अंदर काव्य का बीजा रोपण किया। "कवितानामा" मेरी काव्ययात्रा का प्रथम प्रयास नहीं है। इसके पूर्व अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशनार्थ प्रेषित की, लेकिन सखेद वापस आती रचनाओं ने मेरी लेखनी को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया था। लेकिन कोटिशः धन्यवाद डिजिटल मीडिया के इस मंच को, जिसने मेरी रुकी हुई लेखनी को पुनः एक प्रवाह, एक गति प्रदान कर लिखने के उत्साह को एक बार फिर से प्रेरित किया। पुनश्च धन्यवाद!☺️ वंदना राय

क्रिकेट की बात

in poems

खेल का मैदान हो, या युद्ध का आह्वान हो, खेल कर पछाड़ दो, युद्ध हो दहाड़ दो। फिर क्रिकेट की बात हो, या कश्मीर पर आघात हो। धूल हम चटाएगें, प्रतिद्वंद्वी उठ न पाएंगे। शेर ए हिन्द सज्ज हो, जीत में निमज्ज हो।

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सुनंदा बुआ

in Stories

सुनंदा बुआ, जिन्हें पूरा मोहल्ला इसी नाम से पुकारता था, यहां तक कि तीन पीढ़ियों तक के लोग यानि कि बाप, बेटे और  पोते सभी लोग उन्हें इसी नाम से जानते थे। किसी के घर की कितनी भी खुफिया जानकारी हो, सुनंदा बुआ के आंख,कान,नाक से छिप नहीं सकती थी। कोई कितना भी अपने घर…

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देश का चौकीदार

in poems

🔥 आग में तपकर ही सोना भी, अपना मूल्य बताता है। तेज धार पर घिस घिसकर ही, हीरा चमक दिखाता है। जीवन भी कुछ ऐसा ही है। जो हमको ये सिखाता है, संघर्ष आंच में तपकर मानव, उच्च शिखर पर जाता है। देश का सेवक बनकर जो, जनकल्याण कर पाता है। तभी तो ‘चौकीदार’ भी,…

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अमावस की रात

in Stories

अमावस का घनघोर अंधेरा और बांसुरी पर  बजती कोई मीठी सी धुन ,ना जाने किस रूह को किसकी तलाश है, किसका दर्द सिसकियां लेता है, रोज रात के सन्नाटे में, यह किस रूह की तड़प बांसुरी की धुन में सुनाई देती है, यहां के लोगों से सुना है, कि किसी बांसुरी वादक की रूह यहां…

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ओ,सखि………!

in poems

बात दिल की तुम अपनी, छुपाया न करो। बात जो भी हो, वो तुम बताया करो। बातों बातों में ही, रूठ जाती हो, दर्द के समंदर में, डूब जाती हो। कभी रेत के सहरा पे भी, आ जाया करो। रेत में भी खिलते हैं, कांटों पे फूल, जिन्हें देखकर उम्मीदें, जगाया करो। हर बात  का…

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बचपन

in poems

मस्तमौला फक्कड़पन, मासूमियत भरा बचपन, महंगे खिलौनों की दरकार नहीं। माटी से काम चला लेंगे,   हम आनंद मना लेंगे। ये भोलापन,ये अल्हड़पन, जिसको कहते हैं,सब बचपन।

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मेरे बाबा

in poems

  ”रहे ना कोई सपने बाकी, नाप ले तू अंतरिक्ष की थाती।” कहते रहते, बाबा मेरे, जब उनके पास मैं जाती, उनके ऊंचे सपनों को मैं, देख-देख घबराती। आते जाते डांटा करते, पढ़ती क्यों नहीं दिखती, जब देखो तब बातों में ही, समय नष्ट क्यों करती, जो बातें तब थी चुभती, आज समझ में आती,…

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ध्यान

in Blogs

हमलोग उम्र लंबी करने में कामयाब हो गए हैं, लेकिन जीवन को आनंद पूर्ण बनाने में अभी तक अक्षम है। हम लोगों ने ऊंची अट्टालिकाएं  तो बनवा ली, लेकिन मन मंदिर का निर्माण नहीं कर पाए। जहां बैठकर साधना और ध्यान के कुछ पल दे सकें, मानव मन तब तक सुख के लिए भटकता रहेगा,…

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जो जस करि………!

in Blogs

जब राम के बाणों से धराशाई रावण मरणासन्न था, तब राम ने लक्ष्मण से कहा, कि लक्ष्मण रावण अब कुछ ही देर का मेहमान है, उसके साथ उसका अमूल्य ज्ञान भी समाप्त हो जाएगा। इसके पहले तुम उसके पास जाकर उसके ज्ञान से स्वयं को आलोकित कर लो। जब लक्ष्मण रावण के सिरहाने जाकर खड़े…

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अहिंसा के पुरोधा

in Blogs

अहिंसा को यदि एक शब्द का महाकाव्य कहा जाए, तो उसके अनेक छंद इसी शब्द से प्रगट हो सकते हैं। महात्मा गांधी अहिंसा का प्रथम मानव छंद है ।गांधी मानवता के अलंकार हैं । 2 अक्टूबर को इस महा मानव ने जन्म लिया था। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अहिंसा दिवस भी घोषित किया…

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