मेरा गट्टू

in poems

मेरा है गट्टू खरगोश,

देता है मन को परितोष ,

प्यार जताता, खुशी दिखाता,

जब आती हूं ,घर को लौट,

कान झटक और मटक मटक,

जब चलता है तो लगता है ,

नन्हा सा कोई बच्चा यूं ही ,

मचल मचल कर चलता है ,

सुबह सवेरे सही समय पर,

आकर मुझे जगाता है,

जैसे कोई झप्पी देकर,

सुबह-सुबह उठाता है,

कदम फर्श पर पड़ते ही,

यूं नाच नाच इठलाता है,

जैसे कोई बड़ा काम ,

करके कोई इतराता है,

आगे पीछे घूम घूम कर ,

यूं परवाह दिखाता है ,

हम  इंसानों  को जैसे,

ये प्रेम का पाठ पढ़ाता है।