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ध्यान

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हमलोग उम्र लंबी करने में कामयाब हो गए हैं, लेकिन जीवन को आनंद पूर्ण बनाने में अभी तक अक्षम है। हम लोगों ने ऊंची अट्टालिकाएं  तो बनवा ली, लेकिन मन मंदिर का निर्माण नहीं कर पाए। जहां बैठकर साधना और ध्यान के कुछ पल दे सकें, मानव मन तब तक सुख के लिए भटकता रहेगा,…

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जो जस करि………!

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जब राम के बाणों से धराशाई रावण मरणासन्न था, तब राम ने लक्ष्मण से कहा, कि लक्ष्मण रावण अब कुछ ही देर का मेहमान है, उसके साथ उसका अमूल्य ज्ञान भी समाप्त हो जाएगा। इसके पहले तुम उसके पास जाकर उसके ज्ञान से स्वयं को आलोकित कर लो। जब लक्ष्मण रावण के सिरहाने जाकर खड़े…

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अहिंसा के पुरोधा

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अहिंसा को यदि एक शब्द का महाकाव्य कहा जाए, तो उसके अनेक छंद इसी शब्द से प्रगट हो सकते हैं। महात्मा गांधी अहिंसा का प्रथम मानव छंद है ।गांधी मानवता के अलंकार हैं । 2 अक्टूबर को इस महा मानव ने जन्म लिया था। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अहिंसा दिवस भी घोषित किया…

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आत्मानुशासन

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स्वाधीनता सिर्फ एक शब्द नहीं, अनंत प्रतिक्षाओं,अनगिनत बलिदानों ,अतृप्त प्यास से उपजी एक जीवन यात्रा है। जिसमें विराम के लिए समय कहां ?स्वाधीनता के लिए तड़प की अलख यदि हमारे क्रांतिकारियों ने अपने खून देकर जगाई ना होती,तो हम और आप तो होते, लेकिन यह स्वाधीनता की सुगंध कहां होती? इस स्वाधीनता की सुगंध को…

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‘बचपन’ आज और कल

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समय की थोड़ी सी इकाइयो का लेखा-जोखा नहीं, जीवन का सौंदर्य है बचपन ।आज बचपन की मोहक स्मृतियां दस्तक दे रही हैं ,इसलिए सुधी पाठकों से स्मृतियां सांझा करने के लिए लेखनी उतावली हो रही है। गर्मी की छुट्टियां और शरारतो का दौर शुरु, धूल की परवाह किए बिना आंधियों में अमिया चुनने दौड़ पड़ना,…

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अंधकार से प्रकाश की ओर

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संस्कृत भाषा में एक कहानी है, “तत् त्वम् असि” जिसमें ऋषि आरुणि अपने पुत्र श्वेतकेतु का अहंकार दूर करने के लिए उसे बरगद के बीज का दृष्टांत दिखाकर समझाते हैं, कि ‘एक बीज में विकास की अनंत संभावनाएं होती हैं, जो अनुकूल मिट्टी पानी और धूप पाकर विशाल वृक्ष का रूप ले लेती है। बीज…

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विश्व शांति

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“विश्व शांति” सबसे दुर्लभ गीत है आज । शांति का मंत्र हम नहीं सहेज पाए। लेकिन प्रकृति ने से बचा रखा है।यह भी अभी गुंजित है, फूलों की सुगंध में, चातक की प्यास में, बगुले की आस में, भोले विश्वास में, सभी भाषाओं से परे सुना और समझा जा सकता है,शांति और मौन का गीत।…

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राम के ईश्वरीय गुण

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राम का जन्म एक राज कुमार के रूप में हुआ, जब उनका राजतिलक होना था, उसी समय घटनाक्रम कुछ ऐसे बदले की उन्हें पत्नी के साथ जंगल में जाकर रहना पड़ा| जहाँ उनकी पत्नी का अपहरण भी हो गया और पत्नी को मुक्त कराने के लिए उन्हें युद्ध भी लड़ना पड़ा । फिर जब पत्नी…

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