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HindiPoems

ज़न्नत

in poems

नि: शब्द धरा,आकाश मेघ, कर रहे सभी, सिर्फ प्रश्न एक, ज़न्नत की बातें , करते हो, मरते हो बस ज़न्नत के लिए, लेकिन ज़न्नत में रहते हो, क्या तुमको ये एहसास नहीं? ज़न्नत ज़न्नत, करते करते, तुम इतने रक्त बहाते हो, ज़न्नत जैसे कश्मीर को भी क्यूं दोज़ख बनवाते हो? आए हो, खाली हाथ ही,…

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पुलवामा अटैक

in poems

वो चार शेर ही काफी थे, जिनकी जड़े हिलाने को, इसलिए पीठ पर वार किया, औकात न थी, आजमाने को। जगे शेर से पंगा ले, ये कायर की औकात नहीं, छल छद्म ही जिनके खून में है, उन्हें सबक दे, सौगात नहीं। हुए हैं दो दो हाथ,जब जब, मानवता हारी है, अब उठो, युद्ध उदघोष…

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सड़क

in poems

खुली सड़क पर घूम रहा था, वो अनाथ बच्चा, मै बोली, तुम कुछ पढो,लिखो, यूं घूमना नहीं अच्छा । मै सड़क किनारे पला, बढ़ा, इस खुली सड़क पर सोता हूं। भूख से पिचका पेट लिए, भरने को इसे तरसता हूं। तुम बड़े लोग का पेट,जेब, हरदम रहता  है,भरा भरा, तभी तुम्हे तो दिखता है, हर…

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ऐ खुदा!

in poems

मेरे स्वप्न अब भी है राह में , और मंजिलें इंतजार में, ऐ खुदा! मुझे तू नवाज दे, मेरे पंख को परवाज दे, मैं किसी के स्वप्न को जी सकूँँ, किसी और का दर्द भी पी सकूंँ, मुझे ऐसी करुणा अपार दे, जीवन का अर्थ निखार दें, यह आत्मा की पुकार है , किसी के…

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श्रद्धांजलि

in poems

माँ तू चली गयी और पीछे छोड़ गयी गहरी पीड़ा की रेख अवसादों का कुञ्ज जिसे अब तू कभी न पायेगी देख ईश्वर के दरबार में तेरा हो अभिषेक निर्वासित सा जीवन जीकर सुख दुःख से निर्लिप्त रही परिजनों से अतृप्त शिव की नगरी काशी में कर के जीवन दान परमपिता के चरणो में अब…

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जीवन यात्रा

in poems

ज़िन्दगी में आगे जैसे ही बढ़ते चले गये, कदमों के निशां खुद ही मिटते चले गये, किसी ने मुझे पीछे पुकारा ज़रूर था, वो आवाज़ दुनिया के शोर में घुटते चले गये। बढ़ते हुए कदम ने, ला खड़ा किया जहाँ, उस अर्श से अब फर्श भी दिखता नहीं मुझे, तारीख की गुस्ताख़ियां तो देखिये हुज़ूर, ग़र…

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इच्छा

in poems

समर्पण ही है पारावार, नाविक ले चल मुझे उस पार, हरियाली का हो संसार, दिव्यता हो अनुपम उपहार, नाविक ले चल मुझे उस पार, जीवन उलझा जाल में, कथा बनती है काल में, कहना क्या इस हाल में? आधा जीवन तो बीत गया, आधा ही बीता जाना है, कुछ पल का ही ये बाना है,…

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सन्नाटे

in poems

दुःख को मूक, सुखो को मुखरित हो जाने दो, सन्नाटे है बातें करते, हर दम मेरे संग ही रहते, सन्नाटों को और विगुंजित हो जाने दो, दुःख को मूक, सुखों को मुखरित हो जाने दो, घोर अंधेरा है घिर आया, राह नही पड़ता दिखलाई, कितनी दूर मैं चली आई, जीवन के आँगन में, धूप निकल…

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