Tag archive

Mythology

जो जस करि………!

in Blogs

जब राम के बाणों से धराशाई रावण मरणासन्न था, तब राम ने लक्ष्मण से कहा, कि लक्ष्मण रावण अब कुछ ही देर का मेहमान है, उसके साथ उसका अमूल्य ज्ञान भी समाप्त हो जाएगा। इसके पहले तुम उसके पास जाकर उसके ज्ञान से स्वयं को आलोकित कर लो। जब लक्ष्मण रावण के सिरहाने जाकर खड़े…

Keep Reading

शकुन्तला

in poems

क्रोध को जीता नहीं, और दे दिया अभिशप्त जीवन। शकुन्तला जब बैठ कुटिया में, कर रही थी, मधुर चिंतन। दोष उसका बस यही था, देख न पाई प्रलय को, भावना में बह गयी, पी गयी पीड़ा के गरल को। निर्दोष शकुन्तला सोच रही, वो किस समाज का हिस्सा है? अपने अस्तित्व को खोज रही, ये…

Keep Reading

राजा भोज

in Stories

  राजा भोज जब 5 वर्ष के थे, तब उनके पिता बहुत बीमार हो गए थे। बहुत उपचार के बाद भी जब राजा की तबीयत में संतोषजनक सुधार न हुआ, तब राजा ने अपने भाई मुंज को बुलवाया और कहा कि मेरा पुत्र भोजराज अभी बहुत छोटा है, इसके राज्य संभालने लायक होने तक, राज्य…

Keep Reading

राम के ईश्वरीय गुण

in Blogs

राम का जन्म एक राज कुमार के रूप में हुआ, जब उनका राजतिलक होना था, उसी समय घटनाक्रम कुछ ऐसे बदले की उन्हें पत्नी के साथ जंगल में जाकर रहना पड़ा| जहाँ उनकी पत्नी का अपहरण भी हो गया और पत्नी को मुक्त कराने के लिए उन्हें युद्ध भी लड़ना पड़ा । फिर जब पत्नी…

Keep Reading

हे कृष्ण !

in poems

सौंदर्य का संधान हो तुम, माधुर्य का आधान हो तुम, सौम्यता का पर्याय हो तुम, गाम्भीर्य का अभिप्राय हो तुम, मेरे अबोध अन्तःस्थल की, अभिज्ञान हो तुम, विश्रांति हो तुम ।

Keep Reading

द्रौपदी की व्यथा

in poems

अरे! केशव…,आओ न, प्रतीक्षारत नयन मेरे, भींगे भींगे से क्यूँ है ? बताओ न…, घाव गहरे है, जीवन पे पहरे है, अगर लगा सको तो, थोड़ी मरहम लगाओ न, केशव…,आओ न, आगत भविष्य तो पता नही, बीता अतीत भी रिसा नही, बूँद बूँद जो रीत रहा जीवनघट, वो भर जाओ न,केशव…,आओ न, कुछ पल साथ…

Keep Reading

महाभारत

in poems

अग्निगर्भा द्रौपदी की, बात है इतनी पुरानी, मान और अपमान के, दस्तूर की ये है कहानी। नारी पर आघात की, और फिर प्रतिघात की, रिश्तों में व्यवधान की, युद्ध के संधान की, दम्भ था विकराल इतना, जल गया संसार कितना, बन गई श्मशान धरती, रह गयी बस रुदन सिसकी। वो कैसी भीष्म प्रतिज्ञा थी, जो…

Keep Reading

Go to Top