महाभारत

in poems

अग्निगर्भा द्रौपदी की, बात है इतनी पुरानी, मान और अपमान के, दस्तूर की ये है कहानी। नारी पर आघात की, और फिर प्रतिघात की, रिश्तों में व्यवधान की, युद्ध के संधान की, दम्भ था विकराल इतना, जल गया संसार कितना, बन गई श्मशान धरती, रह गयी बस रुदन सिसकी। वो कैसी भीष्म प्रतिज्ञा थी, जो…

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जीवन संवाद

in poems

चलो आज फिर काव्य लिखें, जीवन का संभाव्य लिखें, चारो ओर बिखरे जीवन पर, फिर थोड़ा संवाद लिखें, जीवन जीतना गहरा है, उतना ही तो पहरा है, मुक्तिबोध के कुछ छन्दों का, फिर थोड़ा अनुवाद लिखे, युवा मन पर ग्रंथ लिखें, अनुशासन प्रबन्ध लिखें, व्याकुल मन की बेचैनी पर, प्रेम का अनुबंध लिखें, नए सिरे…

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बादल

in poems

बादलों के झुँड से, था झाँकता, नन्हा सा बादल, हँस के कहता है धरा से, फिर बरसूंगा सुबह से, पूर्ण कर जलकुम्भ सारे, ज्यादा बरसूं सह नही पाती, कम बरसूं तो रह नही पाती, तेरे प्यारे सो रहे है, आलस में ही खो रहे है, उन्हें जगा और फिर करा तू, जलप्रबन्ध दुरुस्त सारे, जब…

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अभिलाषा

in poems

चाहती हूँ बूँद हो लूँ , घन घटाओं संग उडूँ या , झूमती पतंग हो लूँ , सीमाओँ को तोड़ दूँ या , फिर मस्त मलंग हो लूँ , एकरस की कारा से , अब जरा स्वतंत्र हो लूँ , तार सप्तक गा चुकी मैं , मध्य में तो जी रही हूँ , सोचती हूँ…

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दोस्त

in poems

रूठने पर तुम हमको मनाया करो, बात अपने दिल की सुनाया करो, तुम्हारी खन खन हँसी ही मेरा गीत है, तेरे जीवन की धुन ही मेरा मीत है, चोट अपनी न हमसे छिपाया करो, बात जो भी हो, वो तुम बताया करो, माना कि कुछ ना कहना बड़ी बात है, पर दर्द की दवा न…

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जीवन का सार

in poems

हम रोज़ बढ़ते हैं, एक कदम और, अपनी मृत्यु की ओर, फिर क्यों मचा हुआ है, अनर्गल बातों का शोर, दिव्यता की अनुभूति हो, या करुणा का सार, इनके लिए खोलें, हम हृदय के द्वार, जीवन को न बनाये, अनंत लालसाओं का कारागार, मिटने के पहले जीवन, जीने की ले लें हम दीक्षा, वर्ना नष्ट…

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