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happiness

अंतर्भाव

in poems

जीवन के अर्ध शतक पर अब…, कुछ अंतर्मन की बात लिखे, कुछ कोमल अंतर्भाव लिखे, कुछ कटुता के अनुभाव लिखे, कहना सुनना तो बहुत हुआ , कुछ अनचीन्हे मनोभाव लिखे, जो कह न सके, अब तक तुमसे, वो अनकहा प्रतिवाद लिखे। वो भी तो एक ज़माना था, गर्मी की लम्बी रातो में, घर के छत…

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भूली बिसरी बातें

in poems

इतने दिनों के बाद मिले हो, कुछ भूली बिसरी बात करो, कुछ अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनेपन की बात करो, सदियाँ बीती,अर्सा गुजरा, फिर भी तुम बिल्कुल वैसे हो, कुछ शरद शिशिर की बात करो, कुछ ग्रीष्म ऋतु की बात करो, बारिश से गीली सड़को पर, वो नाव चलाना याद करो, गुल्ली डंडो…

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