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Friendship

ओ,सखि………!

in poems

बात दिल की तुम अपनी, छुपाया न करो। बात जो भी हो, वो तुम बताया करो। बातों बातों में ही, रूठ जाती हो, दर्द के समंदर में, डूब जाती हो। कभी रेत के सहरा पे भी, आ जाया करो। रेत में भी खिलते हैं, कांटों पे फूल, जिन्हें देखकर उम्मीदें, जगाया करो। हर बात  का…

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भूली बिसरी बातें

in poems

इतने दिनों के बाद मिले हो, कुछ भूली बिसरी बात करो, कुछ अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनेपन की बात करो, सदियाँ बीती,अर्सा गुजरा, फिर भी तुम बिल्कुल वैसे हो, कुछ शरद शिशिर की बात करो, कुछ ग्रीष्म ऋतु की बात करो, बारिश से गीली सड़को पर, वो नाव चलाना याद करो, गुल्ली डंडो…

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दोस्त

in poems

रूठने पर तुम हमको मनाया करो, बात अपने दिल की सुनाया करो, तुम्हारी खन खन हँसी ही मेरा गीत है, तेरे जीवन की धुन ही मेरा मीत है, चोट अपनी न हमसे छिपाया करो, बात जो भी हो, वो तुम बताया करो, माना कि कुछ ना कहना बड़ी बात है, पर दर्द की दवा न…

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