Tag archive

Hindi Poem

मातृदिवस

in poems

मां ,तू पास नहीं पर, मुझमें स्पंदित रहती, मेरे जीवन के हर पग पर, तू प्रतिबिंबित रहती। पता नही, कैसे?पर, तू आभासित रहती। जीवन के हर पथ पर, मुझको परिभाषित करती। आती जाती बाधाओं को, तू बाधित कर जाती, हिचकोले खाते जीवन को, तू ही राह दिखाती। संदर्भित इस मातृदिवस पर, फिर प्रसंग है आया,।…

Keep Reading

नींव का पत्थर

in poems

जिस की कोमल अनुभूति से, श्वांसे धड़क रही हैं, बन के घर के नींव का पत्थर, फिर भी सिसक रही हैं। उसे “एक” दिन प्रेम प्रर्दशन में, दुनिया न समेटे, जो दुनिया को नवजीवन, और देती बेटी बेटे। जाकर कोई समझाओ, दुनिया उनके आंसू पोंछे, तब सार्थकता मातृदिवस की, जब मांओं की पीड़ा सोखे।

Keep Reading

नारी

in poems

परिभाषित हो प्रेम, जहां पर, भावों से परिपूर्ण वहां पर, तुम मिलती हो। प्रासंगिक हो, जब करुणा का सार, वहां पर, तुम मिलती हो। स्पंदित हो,हर जीवन में प्राण, जहां पर तुम बसती हो।

Keep Reading

विश्वास

in poems
Trust

प्रेम हो विश्वास हो, न्याय का अहसास हो, धुंधलाते परिदृश्य में भी, न्याय की ही बात हो।

Keep Reading

इंतजार में…!

in poems

जा रहा है दिसंबर, ये साल छोड़कर, कि अगले वर्ष आएगा, फिर ठिठुरन ओढ़कर, हर वर्ष की तरह ही, यह वर्ष भी गया, लेकिन इस वर्ष का, अनुभव बहुत नया। कुछ फुर्सत के पल रहे, कुछ ख्वाहिशों के दौर, ज्यों आम के पेड़ों पर , मंजरियों का बौर, जीवन के अनुभवों से, सीख जो मिली,…

Keep Reading

अनकही सी बातें

in poems

कुछ अनकही सी बातें, जो कह रही हूं तुमसे, कम को अधिक समझना, ग़र हो सके जो तुमसे। तेरी बात में था मरहम, वो भी था इक ज़माना, अब काम का बवंडर, है व्यस्तता बहाना। प्रश्नो का है समंदर, और दर्द मेरे अंदर, बहने को है आकुल, ये सोच के हूं व्याकुल। परवाह तो है…

Keep Reading

मेरा गट्टू

in poems

मेरा है गट्टू खरगोश, देता है मन को परितोष , प्यार जताता, खुशी दिखाता, जब आती हूं ,घर को लौट, कान झटक और मटक मटक, जब चलता है तो लगता है , नन्हा सा कोई बच्चा यूं ही , मचल मचल कर चलता है , सुबह सवेरे सही समय पर, आकर मुझे जगाता है, जैसे…

Keep Reading

गुरु शिष्य संवाद

in Blogs

१२ वर्ष तक गुरुकुल  में रह कर शिक्षा प्राप्त करने के बाद शिष्य के जब घर जाने का समय आया,तब शिष्य ने गुरुजी से पूछा,कि गुरुदेव कृपया सांसारिक जीवन को स्वर्ग जैसा सुखद बनाने का उपाय तो बताएं,ताकि जीवन में कष्ट का आगमन न होने पाएं। गुरु ने कहा,कि तुम जीवन के प्राकृतिक नियमों के…

Keep Reading

जीवन प्रत्याशा

in poems

स्व से ऊपर उठो , पुकारता ये तंत्र है, स्व से ऊपर उठो, जीवन का ये मंत्र है, अनगिनत पीड़ित यहाँ पर, अनगिनत शोषित यहाँ पर, अनगिनत आँखे यहाँ पर, जोहती है बाट तेरा, कपकपाते हाथ उठते है , इस उम्मीद पे कि, कोई तो आए जो,कह दे, टूट मत तू , मैं हूँ तेरा,…

Keep Reading

स्वर्णिम स्मृतियाँ

in poems

फूलो कि मुस्कान ? तितलियों की उड़ान? सुबह की ठहरी हुई , ओस की शीतल छुअन ? या ईश्वर की निर्माणकला की , संगीतमय धड़कन? तुम्हारे साथ बिताये पलो को, क्या नाम दूँ ? ये स्वर्णिम स्मृतियों की बाते है, जब शब्द मौन, और अश्रु मुखरित हो जाते है ।

Keep Reading

Go to Top