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Affection

मातृदिवस

in poems

मां ,तू पास नहीं पर, मुझमें स्पंदित रहती, मेरे जीवन के हर पग पर, तू प्रतिबिंबित रहती। पता नही, कैसे?पर, तू आभासित रहती। जीवन के हर पथ पर, मुझको परिभाषित करती। आती जाती बाधाओं को, तू बाधित कर जाती, हिचकोले खाते जीवन को, तू ही राह दिखाती। संदर्भित इस मातृदिवस पर, फिर प्रसंग है आया,।…

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अनकही सी बातें

in poems

कुछ अनकही सी बातें, जो कह रही हूं तुमसे, कम को अधिक समझना, ग़र हो सके जो तुमसे। तेरी बात में था मरहम, वो भी था इक ज़माना, अब काम का बवंडर, है व्यस्तता बहाना। प्रश्नो का है समंदर, और दर्द मेरे अंदर, बहने को है आकुल, ये सोच के हूं व्याकुल। परवाह तो है…

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विरहगीत

in poems

तारों की टिमटिम में हो तुम, चिड़ियों की चहचह में हो तुम, गंगा कि कलकल ध्वनि में तुम, नटराज के डमरु की ध्वनि तुम, गुंजित हो सभी दिशाओं में, प्रतिष्ठित हो ह्रदय में तुम। यूं अनायास क्यों चले गए? मुझको तन्हा क्यों छोड़ गए? संगीत की धुन बन लौट आओ, मेरे जीवन में छा जाओ।…

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