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मातृभूमि

in poems

वो जीना भी क्या जीना है, जो देश हित में जी न सके, वो मरना भी क्या मरना है, जो मातृभूमि पर मर न सके। कितने अनजाने वीरों ने, अपने जो रक्त बहाएं हैं, इस देश के मिट्टी पानी में, उन वीरों की गाथाएं हैं। झांसी की मिट्टी कहती हैं, हर बाला लक्ष्मीबाई हो, पंजाब…

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ज़न्नत

in poems

नि: शब्द धरा,आकाश मेघ, कर रहे सभी, सिर्फ प्रश्न एक, ज़न्नत की बातें , करते हो, मरते हो बस ज़न्नत के लिए, लेकिन ज़न्नत में रहते हो, क्या तुमको ये एहसास नहीं? ज़न्नत ज़न्नत, करते करते, तुम इतने रक्त बहाते हो, ज़न्नत जैसे कश्मीर को भी क्यूं दोज़ख बनवाते हो? आए हो, खाली हाथ ही,…

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