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Desire

कलयुग

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जब त्रेता के स्वर्ण हिरण ने, सीता हरण करा डाला, जब सत्य की खातिर हरिश्चंद्र को, सतयुग ने बिकवा डाला, तब कलयुग की है क्या बिसात ? जो स्वर्ण मोह से बच जाए, या फिर असत्य से दूर रहे , और सत्य वचन पर टिक जाए , अब तो कलयुग की बारी है, और लोलुपता…

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शंकर

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जीवन के दहकते प्यालों में, हर पीड़ा को जल जाने दो, उस राख से नवनिर्माण करो, सुख परिभाषित हो जाने दो| बाधाओं का उत्तुंग शिखर, उस पर बर्फीली आंधी को, जिसने झेला स्थिर होकर, उसमें वासित होते शंकर|

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ख्वाहिशें

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चलो, बढ़ती हुई उम्र के साए में बैठकर , जीवन की तेज धूप से , कुछ फासले कर लें, चाहतों से भरे इस जीवन को , चलो, आज खाली कर लें , रोज बदलते किरदारों से , आज ,अभी ,तौबा कर लें , तुम अपनी तन्हाइयों को , रुखसत कर दो, हम अपने सन्नाटों से…

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इच्छा

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समर्पण ही है पारावार, नाविक ले चल मुझे उस पार, हरियाली का हो संसार, दिव्यता हो अनुपम उपहार, नाविक ले चल मुझे उस पार, जीवन उलझा जाल में, कथा बनती है काल में, कहना क्या इस हाल में? आधा जीवन तो बीत गया, आधा ही बीता जाना है, कुछ पल का ही ये बाना है,…

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अभिलाषा

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चाहती हूँ बूँद हो लूँ , घन घटाओं संग उडूँ या , झूमती पतंग हो लूँ , सीमाओँ को तोड़ दूँ या , फिर मस्त मलंग हो लूँ , एकरस की कारा से , अब जरा स्वतंत्र हो लूँ , तार सप्तक गा चुकी मैं , मध्य में तो जी रही हूँ , सोचती हूँ…

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