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Desire

इच्छा

in poems

समर्पण ही है पारावार, नाविक ले चल मुझे उस पार, हरियाली का हो संसार, दिव्यता हो अनुपम उपहार, नाविक ले चल मुझे उस पार, जीवन उलझा जाल में, कथा बनती है काल में, कहना क्या इस हाल में? आधा जीवन तो बीत गया, आधा ही बीता जाना है, कुछ पल का ही ये बाना है,…

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अभिलाषा

in poems

चाहती हूँ बूँद हो लूँ , घन घटाओं संग उडूँ या , झूमती पतंग हो लूँ , सीमाओँ को तोड़ दूँ या , फिर मस्त मलंग हो लूँ , एकरस की कारा से , अब जरा स्वतंत्र हो लूँ , तार सप्तक गा चुकी मैं , मध्य में तो जी रही हूँ , सोचती हूँ…

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