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faith

शकुन्तला

in poems

क्रोध को जीता नहीं, और दे दिया अभिशप्त जीवन। शकुन्तला जब बैठ कुटिया में, कर रही थी, मधुर चिंतन। दोष उसका बस यही था, देख न पाई प्रलय को, भावना में बह गयी, पी गयी पीड़ा के गरल को। निर्दोष शकुन्तला सोच रही, वो किस समाज का हिस्सा है? अपने अस्तित्व को खोज रही, ये…

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नारी

in poems

परिभाषित हो प्रेम, जहां पर, भावों से परिपूर्ण वहां पर, तुम मिलती हो। प्रासंगिक हो, जब करुणा का सार, वहां पर, तुम मिलती हो। स्पंदित हो,हर जीवन में प्राण, जहां पर तुम बसती हो।

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विश्वास

in poems
Trust

प्रेम हो विश्वास हो, न्याय का अहसास हो, धुंधलाते परिदृश्य में भी, न्याय की ही बात हो।

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