माँ

in poems

तू कैसे जान लेती है माँ
मेरी भूख को, मेरी प्यास को
मैं चाहती हूं क्या?
और मेरी आस को ?
वो कौन सा जादू है माँ
वो मुझे भी सीखा दे तू
वो कौन सी थाती है माँ
वो मुझे भी दिखा दे तू
दुनिया के सारे गरल
कर पान तू जीवित रही
कैसे मुझे अमृत दिया
विषपान के प्रतिदान पर
वो कौन सा जादू है माँ
वो मुझे भी सीखा दे तू
दुनिया के झंझावातो ने
जब जब मुझे घायल किया
तब तब तुम्हारी याद ने
कितना मुझे सम्बल दिया
तू जादू है या जन्नत है
मेरी जितनी भी मन्नत है
वो तेरे नाम से उन्नत है
मुझको तो अभी तक हैरत है
जिस तरह गढ़ा तूने खुद को
क्यों ढाल न पायी मैं खुद को