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Childhood

बचपन

in poems

मस्तमौला फक्कड़पन, मासूमियत भरा बचपन, महंगे खिलौनों की दरकार नहीं। माटी से काम चला लेंगे,   हम आनंद मना लेंगे। ये भोलापन,ये अल्हड़पन, जिसको कहते हैं,सब बचपन।

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‘बचपन’ आज और कल

in Blogs

समय की थोड़ी सी इकाइयो का लेखा-जोखा नहीं, जीवन का सौंदर्य है बचपन ।आज बचपन की मोहक स्मृतियां दस्तक दे रही हैं ,इसलिए सुधी पाठकों से स्मृतियां सांझा करने के लिए लेखनी उतावली हो रही है। गर्मी की छुट्टियां और शरारतो का दौर शुरु, धूल की परवाह किए बिना आंधियों में अमिया चुनने दौड़ पड़ना,…

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बचपन

in poems

आँख खुली और टूट गया, एक सपना था जो छूट गया, माँ की लोरी पिता की थपकी, जब जब मेरी आँखें झपकी, देती है मुझको दिखलाई, अपने शहर की याद जो आई, गुल्ली डंडा, खाना पानी, करती थी अपनी मनमानी, उसपर पड़ी डाँट जो खानी, याद आ गयी नानी, मेरे बचपन की कहानी, छतरी थी…

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