जीवन

in poems

फूलों के लघु जीवन से भी, सीखो और सिखाओ, जीवन आनंद बनाओ, जीवन को अपनाओ । क्या हुआ जो रूठ गया, सपना था गर टूट गया, फिर अपने सोए पौरुष को, एक बार आजमाओ, जीवन आनंद बनाओ, जीवन को अपनाओ। जंगल की सुंदरता देखो, और चिड़ियों का उपवन देखो, हर जीवन कितना सुंदर है, मन…

Keep Reading

इंतजार में…!

in poems

जा रहा है दिसंबर, ये साल छोड़कर, कि अगले वर्ष आएगा, फिर ठिठुरन ओढ़कर, हर वर्ष की तरह ही, यह वर्ष भी गया, लेकिन इस वर्ष का, अनुभव बहुत नया। कुछ फुर्सत के पल रहे, कुछ ख्वाहिशों के दौर, ज्यों आम के पेड़ों पर , मंजरियों का बौर, जीवन के अनुभवों से, सीख जो मिली,…

Keep Reading

प्रेमाग्रह

in poems

इक मोहक सी मुस्कान  लिए, मन में कुछ कुछ अरमान लिए, बोली आकर कुछ छूट गया, उत्साहित मन कुछ टूट गया, मेरे गुरु, शिक्षक, पथदर्शक, इस बाल दिवस पर अपने मुख से, कुछ अपने छंद कहो न ! इस प्रेमाग्रह से चकित हुई, थोड़ी थोड़ी पुलकित भी हुई, फिर उत्साहित हो बोल दिया, दिल का…

Keep Reading

हे! नये साल

in poems

हे! नए साल, तू मुझे बता, क्या बात नयी होगी तुझमें ? क्या प्रात नयी होगी तुझमें ? या घात नयी होगी तुझमें ? क्या नए साल में, भूखों को तू रोटी दिलवाएगा ? या वृद्धों के आश्रम में तू, उनका बेटा लौटाएगा? सारी दुनिया जो जूझ रही, युद्धों को तू रुकवायेगा? या अनाचार की पीड़ा से, तू…

Keep Reading

अनकही सी बातें

in poems

कुछ अनकही सी बातें, जो कह रही हूं तुमसे, कम को अधिक समझना, ग़र हो सके जो तुमसे। तेरी बात में था मरहम, वो भी था इक ज़माना, अब काम का बवंडर, है व्यस्तता बहाना। प्रश्नो का है समंदर, और दर्द मेरे अंदर, बहने को है आकुल, ये सोच के हूं व्याकुल। परवाह तो है…

Keep Reading

Go to Top