शंकर

in poems

जीवन के दहकते प्यालों में, हर पीड़ा को जल जाने दो, उस राख से नवनिर्माण करो, सुख परिभाषित हो जाने दो| बाधाओं का उत्तुंग शिखर, उस पर बर्फीली आंधी को, जिसने झेला स्थिर होकर, उसमें वासित होते शंकर|

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ख्वाहिशें

in poems

चलो, बढ़ती हुई उम्र के साए में बैठकर , जीवन की तेज धूप से , कुछ फासले कर लें, चाहतों से भरे इस जीवन को , चलो, आज खाली कर लें , रोज बदलते किरदारों से , आज ,अभी ,तौबा कर लें , तुम अपनी तन्हाइयों को , रुखसत कर दो, हम अपने सन्नाटों से…

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प्रसंगवश

in poems

कुछ प्रासंगिक उत्तर के लिए, हैं संदर्भित कुछ प्रश्न मेरे| क्या शिक्षा सिर्फ प्रचार तक, या आचरण व्यवहार तक? स्वर्णिम इतिहास हमारा था, ये देश जो इतना प्यारा था| गंगा यमुनी तहज़ीब ने हम को, बडे़ प्यार से पाला था| नदियों को मैला कर डाला, वृक्षों की चिता जला डाली, वर्षावन जाने कहां गए? मौसम…

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उर्मिला का वनवास

in poems

उर्मिला बोली लक्ष्मण से, व्यथित हृदय पर मृदु वचन से, तुमको भाई का साथ मिला, मुझे महलों का वनवास मिला, दोष बता जाते मेरे, तो दूर उन्हें मैं कर पाती, फिर संग तुम्हारे जा पाती, और साथ तुम्हारे रह पाती, यूं बिना कहे तुम चले गए, इस भवसागर में छोड़ गए, किस से पूछूं किस…

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मातृभूमि

in poems

वो जीना भी क्या जीना है, जो देश हित में जी न सके, वो मरना भी क्या मरना है, जो मातृभूमि पर मर न सके। कितने अनजाने वीरों ने, अपने जो रक्त बहाएं हैं, इस देश के मिट्टी पानी में, उन वीरों की गाथाएं हैं। झांसी की मिट्टी कहती हैं, हर बाला लक्ष्मीबाई हो, पंजाब…

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आरक्षण

in poems

स्वतंत्रता की स्वर्ण-जयन्ती को, बीत गए कई साल। जातिवाद के आरक्षण से, प्रतिभाएं अब भी बेहाल। श्रम का हो सम्मान, सभी को अवसर मिलें समान। अभिनन्दित हो युवा देश का, हो प्रतिभाएं गतिमान। एक बार फिर ज्ञानमार्ग जब, प्रक्षालित हो जाएगा। फिर से अपना देश,ये “भारत” विश्व गुरु बन जाएगा।

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