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poems - page 3

देशहित

in poems

वो जीना भी क्या जीना है, जो देश हित में जी न सके, वो मरना भी क्या मरना है, जो मातृभूमि पर मर न सके। कितने अनजाने वीरों ने, अपने जो रक्त बहाएं है, इस देश के मिट्टी पानी में, उन वीरों की गाथाएं हैं। झांसी की मिट्टी कहती हैं, हर बाला लक्ष्मीबाई हो, पंजाब…

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ज़न्नत

in poems

नि: शब्द धरा,आकाश मेघ, कर रहे सभी, सिर्फ प्रश्न एक, ज़न्नत की बातें , करते हो, मरते हो बस ज़न्नत के लिए, लेकिन ज़न्नत में रहते हो, क्या तुमको ये एहसास नहीं? ज़न्नत ज़न्नत, करते करते, तुम इतने रक्त बहाते हो, ज़न्नत जैसे कश्मीर को भी क्यूं दोज़ख बनवाते हो? आए हो, खाली हाथ ही,…

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पुलवामा अटैक

in poems

वो चार शेर ही काफी थे, जिनकी जड़े हिलाने को, इसलिए पीठ पर वार किया, औकात न थी, आजमाने को। जगे शेर से पंगा ले, ये कायर की औकात नहीं, छल छद्म ही जिनके खून में है, उन्हें सबक दे, सौगात नहीं। हुए हैं दो दो हाथ,जब जब, मानवता हारी है, अब उठो, युद्ध उदघोष…

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सड़क

in poems

खुली सड़क पर घूम रहा था, वो अनाथ बच्चा, मै बोली, तुम कुछ पढो,लिखो, यूं घूमना नहीं अच्छा । मै सड़क किनारे पला, बढ़ा, इस खुली सड़क पर सोता हूं। भूख से पिचका पेट लिए, भरने को इसे तरसता हूं। तुम बड़े लोग का पेट,जेब, हरदम रहता  है,भरा भरा, तभी तुम्हे तो दिखता है, हर…

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सुविचार

in poems

मुस्कुराती रात हो, खिलखिलाता प्रात हो, हर सुबह के सूर्य में, कुछ विशेष बात हो।

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विश्वास

in poems
Trust

प्रेम हो विश्वास हो, न्याय का अहसास हो, धुंधलाते परिदृश्य में भी, न्याय की ही बात हो।

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जीवन

in poems

फूलों के लघु जीवन से भी, सीखो और सिखाओ, जीवन आनंद बनाओ, जीवन को अपनाओ । क्या हुआ जो रूठ गया, सपना था गर टूट गया, फिर अपने सोए पौरुष को, एक बार आजमाओ, जीवन आनंद बनाओ, जीवन को अपनाओ। जंगल की सुंदरता देखो, और चिड़ियों का उपवन देखो, हर जीवन कितना सुंदर है, मन…

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इंतजार में…!

in poems

जा रहा है दिसंबर, ये साल छोड़कर, कि अगले वर्ष आएगा, फिर ठिठुरन ओढ़कर, हर वर्ष की तरह ही, यह वर्ष भी गया, लेकिन इस वर्ष का, अनुभव बहुत नया। कुछ फुर्सत के पल रहे, कुछ ख्वाहिशों के दौर, ज्यों आम के पेड़ों पर , मंजरियों का बौर, जीवन के अनुभवों से, सीख जो मिली,…

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