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Vandana Rai - page 7

Vandana Rai has 94 articles published.

पिताजी के अंग्रेजी, उर्दू के कुहासे के बीच, मैंने अपनी माँँ के लोकगीतों को ही अधिक आत्मसात किया। उसी लोक संगीत की समझ ने मेरे अंदर काव्य का बीजा रोपण किया। "कवितानामा" मेरी काव्ययात्रा का प्रथम प्रयास नहीं है। इसके पूर्व अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशनार्थ प्रेषित की, लेकिन सखेद वापस आती रचनाओं ने मेरी लेखनी को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया था। लेकिन कोटिशः धन्यवाद डिजिटल मीडिया के इस मंच को, जिसने मेरी रुकी हुई लेखनी को पुनः एक प्रवाह, एक गति प्रदान कर लिखने के उत्साह को एक बार फिर से प्रेरित किया। पुनश्च धन्यवाद!☺️ वंदना राय

जीवन यात्रा

in poems

ज़िन्दगी में आगे जैसे ही बढ़ते चले गये, कदमों के निशां खुद ही मिटते चले गये, किसी ने मुझे पीछे पुकारा ज़रूर था, वो आवाज़ दुनिया के शोर में घुटते चले गये। बढ़ते हुए कदम ने, ला खड़ा किया जहाँ, उस अर्श से अब फर्श भी दिखता नहीं मुझे, तारीख की गुस्ताख़ियां तो देखिये हुज़ूर, ग़र…

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अंतर्भाव

in poems

जीवन के अर्ध शतक पर अब…, कुछ अंतर्मन की बात लिखे, कुछ कोमल अंतर्भाव लिखे, कुछ कटुता के अनुभाव लिखे, कहना सुनना तो बहुत हुआ , कुछ अनचीन्हे मनोभाव लिखे, जो कह न सके, अब तक तुमसे, वो अनकहा प्रतिवाद लिखे। वो भी तो एक ज़माना था, गर्मी की लम्बी रातो में, घर के छत…

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भूली बिसरी बातें

in poems

इतने दिनों के बाद मिले हो, कुछ भूली बिसरी बात करो, कुछ अपनी कहो, कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनेपन की बात करो, सदियाँ बीती,अर्सा गुजरा, फिर भी तुम बिल्कुल वैसे हो, कुछ शरद शिशिर की बात करो, कुछ ग्रीष्म ऋतु की बात करो, बारिश से गीली सड़को पर, वो नाव चलाना याद करो, गुल्ली डंडो…

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मानवता

in poems

निज सुखो की मरीचिका में, खो न जाना, जीवन बदलता है यहाँ, ये भूल न जाना, फूल है जीवन में ग़र, तो शूल भी है, चूर मत हो गर्व में, क्योंकि यहाँ पर धूल भी है, धूसरित हो जाएँगी, वो गर्व की आँधियाँ नशीली, हौसला दे तू उन्हें बढ़कर, जिनकी हुई है आँखे गीली  ।

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जीवन प्रत्याशा

in poems

स्व से ऊपर उठो , पुकारता ये तंत्र है, स्व से ऊपर उठो, जीवन का ये मंत्र है, अनगिनत पीड़ित यहाँ पर, अनगिनत शोषित यहाँ पर, अनगिनत आँखे यहाँ पर, जोहती है बाट तेरा, कपकपाते हाथ उठते है , इस उम्मीद पे कि, कोई तो आए जो,कह दे, टूट मत तू , मैं हूँ तेरा,…

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स्वर्णिम स्मृतियाँ

in poems

फूलो कि मुस्कान ? तितलियों की उड़ान? सुबह की ठहरी हुई , ओस की शीतल छुअन ? या ईश्वर की निर्माणकला की , संगीतमय धड़कन? तुम्हारे साथ बिताये पलो को, क्या नाम दूँ ? ये स्वर्णिम स्मृतियों की बाते है, जब शब्द मौन, और अश्रु मुखरित हो जाते है ।

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इच्छा

in poems

समर्पण ही है पारावार, नाविक ले चल मुझे उस पार, हरियाली का हो संसार, दिव्यता हो अनुपम उपहार, नाविक ले चल मुझे उस पार, जीवन उलझा जाल में, कथा बनती है काल में, कहना क्या इस हाल में? आधा जीवन तो बीत गया, आधा ही बीता जाना है, कुछ पल का ही ये बाना है,…

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हे कृष्ण !

in poems

सौंदर्य का संधान हो तुम, माधुर्य का आधान हो तुम, सौम्यता का पर्याय हो तुम, गाम्भीर्य का अभिप्राय हो तुम, मेरे अबोध अन्तःस्थल की, अभिज्ञान हो तुम, विश्रांति हो तुम ।

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द्रौपदी की व्यथा

in poems

अरे! केशव…,आओ न, प्रतीक्षारत नयन मेरे, भींगे भींगे से क्यूँ है ? बताओ न…, घाव गहरे है, जीवन पे पहरे है, अगर लगा सको तो, थोड़ी मरहम लगाओ न, केशव…,आओ न, आगत भविष्य तो पता नही, बीता अतीत भी रिसा नही, बूँद बूँद जो रीत रहा जीवनघट, वो भर जाओ न,केशव…,आओ न, कुछ पल साथ…

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सन्नाटे

in poems

दुःख को मूक, सुखो को मुखरित हो जाने दो, सन्नाटे है बातें करते, हर दम मेरे संग ही रहते, सन्नाटों को और विगुंजित हो जाने दो, दुःख को मूक, सुखों को मुखरित हो जाने दो, घोर अंधेरा है घिर आया, राह नही पड़ता दिखलाई, कितनी दूर मैं चली आई, जीवन के आँगन में, धूप निकल…

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