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Vandana Rai - page 5

Vandana Rai has 86 articles published.

पिताजी के अंग्रेजी, उर्दू के कुहासे के बीच, मैंने अपनी माँँ के लोकगीतों को ही अधिक आत्मसात किया। उसी लोक संगीत की समझ ने मेरे अंदर काव्य का बीजा रोपण किया। "कवितानामा" मेरी काव्ययात्रा का प्रथम प्रयास नहीं है। इसके पूर्व अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशनार्थ प्रेषित की, लेकिन सखेद वापस आती रचनाओं ने मेरी लेखनी को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया था। लेकिन कोटिशः धन्यवाद डिजिटल मीडिया के इस मंच को, जिसने मेरी रुकी हुई लेखनी को पुनः एक प्रवाह, एक गति प्रदान कर लिखने के उत्साह को एक बार फिर से प्रेरित किया। पुनश्च धन्यवाद!☺️ वंदना राय

गुरु शिष्य संवाद

in Stories

१२ वर्ष तक गुरुकुल  में रह कर शिक्षा प्राप्त करने के बाद शिष्य के जब घर जाने का समय आया,तब शिष्य ने गुरुजी से पूछा,कि गुरुदेव कृपया सांसारिक जीवन को स्वर्ग जैसा सुखद बनाने का उपाय तो बताएं,ताकि जीवन में कष्ट का आगमन न होने पाएं। गुरु ने कहा,कि तुम जीवन के प्राकृतिक नियमों के…

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आस

in poems

घनघोर अमा में आस की, अन्तिम किरण अवशेष है, डूबती ही जा रही मानवता, आकण्ठ भ्रष्टाचार में, फिर भी तट पर उम्मीद का, नाविक अकेला शेष है।   पुरज़ोर ग़र प्रयास हो, इन्सानियत की बात हो, सत्य ही पर अड़ सके, भ्रष्ट हो तो लड़ सके, हर जुर्म का इंसाफ होगा, तब स्वर्णिम प्रभात होगा।

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ख़ामोशी

in poems

आओ बैठें साथ कुछ ऐसे, मैं रहूँँ, तुम रहो,और ख़ामोशी हो ज़ुबांं, आँँखों से ही एतराज हो,   आँँखों से ही मनुहार हो, बिना कहे तुम सुन सको, बिना सुने मैं समझ सकूं, ऐसी समझ विस्तार हो,   हर दर्द की परवाह हो, हर ज़ख्म का उपचार हो, तेरे हृदय के तार से, झंंकृत मेरा…

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राजा भोज

in Stories

  राजा भोज जब 5 वर्ष के थे, तब उनके पिता बहुत बीमार हो गए थे। बहुत उपचार के बाद भी जब राजा की तबीयत में संतोषजनक सुधार न हुआ, तब राजा ने अपने भाई मुंज को बुलवाया और कहा कि मेरा पुत्र भोजराज अभी बहुत छोटा है, इसके राज्य संभालने लायक होने तक, राज्य…

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विश्व शांति

in Blogs

“विश्व शांति” सबसे दुर्लभ गीत है आज । शांति का मंत्र हम नहीं सहेज पाए। लेकिन प्रकृति ने से बचा रखा है।यह भी अभी गुंजित है, फूलों की सुगंध में, चातक की प्यास में, बगुले की आस में, भोले विश्वास में, सभी भाषाओं से परे सुना और समझा जा सकता है,शांति और मौन का गीत।…

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ऐ खुदा!

in poems

मेरे स्वप्न अब भी है राह में , और मंजिलें इंतजार में, ऐ खुदा! मुझे तू नवाज दे, मेरे पंख को परवाज दे, मैं किसी के स्वप्न को जी सकूँँ, किसी और का दर्द भी पी सकूंँ, मुझे ऐसी करुणा अपार दे, जीवन का अर्थ निखार दें, यह आत्मा की पुकार है , किसी के…

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राम के ईश्वरीय गुण

in Blogs

राम का जन्म एक राज कुमार के रूप में हुआ, जब उनका राजतिलक होना था, उसी समय घटनाक्रम कुछ ऐसे बदले की उन्हें पत्नी के साथ जंगल में जाकर रहना पड़ा| जहाँ उनकी पत्नी का अपहरण भी हो गया और पत्नी को मुक्त कराने के लिए उन्हें युद्ध भी लड़ना पड़ा । फिर जब पत्नी…

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गांँव वाली चाची

in Stories
KAVITANAAMA

आज बरसों पीछे मन भाग रहा है,तो सोचा उन बीते स्वर्णिम पलों से डायरी के पन्ने स्याह कर लूँ।  विवाह के 2 वर्ष पश्चात में अपने पति और छः माह की बिटिया के साथ लमही रहने के लिए आ गई, फलों का बगीचा और सामने फूलों और हरी घास के लॉन वाला हवेली नुमा घर…

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अकथ

in Stories

जीवन की देहरी पर सोलहवाँ बसंत उतरा और अचानक ही मधु की दुनिया के सारे रंग गुलाबी हो गए । सपनों का सावन आंखों में ठहर गया,खुशबू का मौसम सांसों में पैठ गया, दिन तितली हो गए, और जीवन अनूठा प्रेम राग। किसे भूलती है, वह पहली दस्तक, वह पहली आहट, वह प्रथम आकर्षण की…

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श्रद्धांजलि

in poems

माँ तू चली गयी और पीछे छोड़ गयी गहरी पीड़ा की रेख अवसादों का कुञ्ज जिसे अब तू कभी न पायेगी देख ईश्वर के दरबार में तेरा हो अभिषेक निर्वासित सा जीवन जीकर सुख दुःख से निर्लिप्त रही परिजनों से अतृप्त शिव की नगरी काशी में कर के जीवन दान परमपिता के चरणो में अब…

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