हे नए साल

in poems

सपनों की दीर्घ वीथिका में,
अगणित रंगों के इंद्रधनुष,
लेकर आए ये नया साल ।
कुछ हास नए ,उल्लास नए ,
जीवन के कुछ अभिलाष नए,
है पलक पांवड़े बिछे हुए ,
स्वागत में तोरण सजे हुए,
आना तो खुशियां ले आना,
दुनिया के आंसू ले जाना,
इस वर्ष बहुत तड़पाया है,
दुनिया को कितना रुलाया है ,
हर कोई अब बेहाल हुआ,

देखो ना कैसा हाल हुआ।
जल्दी आओ ना नए साल,
दो दुनिया को खुशियां अपार।

पिताजी के अंग्रेजी, उर्दू के कुहासे के बीच, मैंने अपनी माँँ के लोकगीतों को ही अधिक आत्मसात किया। उसी लोक संगीत की समझ ने मेरे अंदर काव्य का बीजा रोपण किया। "कवितानामा" मेरी काव्ययात्रा का प्रथम प्रयास नहीं है। इसके पूर्व अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशनार्थ प्रेषित की, लेकिन सखेद वापस आती रचनाओं ने मेरी लेखनी को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया था। लेकिन कोटिशः धन्यवाद डिजिटल मीडिया के इस मंच को, जिसने मेरी रुकी हुई लेखनी को पुनः एक प्रवाह, एक गति प्रदान कर लिखने के उत्साह को एक बार फिर से प्रेरित किया। पुनश्च धन्यवाद!☺️ वंदना राय

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