साथ तेरे

in poems

जो समय बिताया, साथ तेरे,
वो समय नहीं छोड़ा मैं ने,
वो हरपल मेरे साथ रहा,
तेरी यादों के एहसास तले।
जब साथ तुम्हारे होते थे,
कभी हंसते थे, कभी रोते थे।
अब हंसना,रोना छोड़ दिया,
दुनियादारी के बोझ तले।
जब संग तुम्हारे, मीलों तक,
बेमतलब घूमा करते थे,
वो यादें अब भी जीने का,
मतलब समझाया करती हैं।
वो पल जो तेरे साथ जिएं,
वो दिल धड़काया करती है।
तुम आओ फिर से, दस्तक दो,
फिर जीने का अरमान जगे,
जो घाव रिस रहे है अब तक,
उनको भी तो आराम लगे।

पिताजी के अंग्रेजी, उर्दू के कुहासे के बीच, मैंने अपनी माँँ के लोकगीतों को ही अधिक आत्मसात किया। उसी लोक संगीत की समझ ने मेरे अंदर काव्य का बीजा रोपण किया। "कवितानामा" मेरी काव्ययात्रा का प्रथम प्रयास नहीं है। इसके पूर्व अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशनार्थ प्रेषित की, लेकिन सखेद वापस आती रचनाओं ने मेरी लेखनी को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया था। लेकिन कोटिशः धन्यवाद डिजिटल मीडिया के इस मंच को, जिसने मेरी रुकी हुई लेखनी को पुनः एक प्रवाह, एक गति प्रदान कर लिखने के उत्साह को एक बार फिर से प्रेरित किया। पुनश्च धन्यवाद!☺️ वंदना राय

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