बीती बातें

in poems

याद आती हैं, बीती बातें,

खट्टी मीठी कड़वी यादें,

जीवन में आगे बढ़ते भी,

छूट कहां पाती हैं यादें।

प्रासंगिक होता जाता है,

अनुभव के दरिया में उतरना,

सार रहित होता जाता है,

चकाचौंध के बीच गुजरना।

जीवन के हर पल में कुछ तो,

मर्म छुपा होता है,इन्हें समझना,

आगे बढ़ना, व्यर्थ कहां होता है?

हर पल जीवन दे जाता है, नयी नयी सौगात,

आओ मिलकर, फिर बैठें और करें पुरानी बात।

पिताजी के अंग्रेजी, उर्दू के कुहासे के बीच, मैंने अपनी माँँ के लोकगीतों को ही अधिक आत्मसात किया। उसी लोक संगीत की समझ ने मेरे अंदर काव्य का बीजा रोपण किया। "कवितानामा" मेरी काव्ययात्रा का प्रथम प्रयास नहीं है। इसके पूर्व अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशनार्थ प्रेषित की, लेकिन सखेद वापस आती रचनाओं ने मेरी लेखनी को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया था। लेकिन कोटिशः धन्यवाद डिजिटल मीडिया के इस मंच को, जिसने मेरी रुकी हुई लेखनी को पुनः एक प्रवाह, एक गति प्रदान कर लिखने के उत्साह को एक बार फिर से प्रेरित किया। पुनश्च धन्यवाद!☺️ वंदना राय

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