तेरा जाना…….|

in poems

तेरे जाने की धुन सुनकर ,

वसंत कहीं रुक जाता है,

आंखों का आंसू ओसबिंदु बन,

घासों पर बिछ जाता है ।

शिशिर ऋतु है ,तेज हवा ,

सूरज की आंख मिचौली है।

है भींगें से कुछ नयन  और,

होठों पर हंसी ठिठोली है ।

आंखों में आंसू रुक जाता,

तो कोहरा कोहरा दिखता है ।

धुंधला जाती है दृष्टि और ,

श्यामल श्यामल सा दिखता है ।

कैसे कह दूं ,कि मत जाओ ।

जीवन के पथ पर रुक जाओ ,

रुकना जीवन का ध्येय  नहीं,

जब चलते रहना जीवन है।