संदेश

in poems

गणतंत्र की सुनहरी,

फिर शाम आ रही है।

सूरज की लालिमा यह,

संदेश गा रही है ।

हम सब हैं भाई बंधु ,

यह देश है हमारा, अक्षुण्ण है,

जिसकी संस्कृति,

अनमोल भाईचारा।

मिलजुल कर हम जिएंगे,

फिर ज़हर ना पिएंगे,

इंसानियत के दुश्मन,

हमको नहीं गवारा।

चलो यह प्रण भी ले लें ।

अभी इसी घड़ी में,

जीवन समर्पित होगा,

वतन की बेहतरी में।