तलाश

in poems

महलों की सिसकती दीवारों को,

कौन शब्द दे पाएगा?

स्वर्ण दिनारों के शोरगुल में ,

दर्द दफन हो जाएगा |

रत्न जड़ित वस्त्रों की चकमक ,

सेवक, दासों का दल बल ,

अंतर्मन की पीड़ा पर ,

मरहम कौन लगाएगा ?

श्वासों पर भी पहरे जिनके,

हंसी पे ताले जड़ते हो,

ऐसी घुटती श्वांसों का,

शोर कौन सुन पाएगा ?

स्वर्ण चमक यदि तप्त हृदय को,

थोड़ी राहत दे पाए ,

चांदी की खनक, यदि तृषित हृदय की,

थोड़ी प्यास बुझा पाए ,

फिर तो इस पूरी दुनिया में ,

सुख की तलाश ही मिट जाए!