शंकर

in poems

जीवन के दहकते प्यालों में,

हर पीड़ा को जल जाने दो,

उस राख से नवनिर्माण करो,

सुख परिभाषित हो जाने दो|

बाधाओं का उत्तुंग शिखर,

उस पर बर्फीली आंधी को,

जिसने झेला स्थिर होकर,

उसमें वासित होते शंकर|