ख्वाहिशें

in poems

चलो, बढ़ती हुई उम्र के साए में बैठकर ,

जीवन की तेज धूप से ,

कुछ फासले कर लें,

चाहतों से भरे इस जीवन को ,

चलो, आज खाली कर लें ,

रोज बदलते किरदारों से ,

आज ,अभी ,तौबा कर लें ,

तुम अपनी तन्हाइयों को ,

रुखसत कर दो,

हम अपने सन्नाटों से आजादी ले लें ,

फिर, लहरों के किनारों पर ,

बालू में बैठकर ,

कुछ सीप में ढूंढे ,

और खुद को ही भूलें|