प्रसंगवश

in poems

कुछ प्रासंगिक उत्तर के लिए,

हैं संदर्भित कुछ प्रश्न मेरे|

क्या शिक्षा सिर्फ प्रचार तक,

या आचरण व्यवहार तक?

स्वर्णिम इतिहास हमारा था,

ये देश जो इतना प्यारा था|

गंगा यमुनी तहज़ीब ने हम को,

बडे़ प्यार से पाला था|

नदियों को मैला कर डाला,

वृक्षों की चिता जला डाली,

वर्षावन जाने कहां गए?

मौसम ने चाल बदल डाली|

मन उद्वेलित , तन थका हुआ,

मानव स्वयं से ठगा हुआ|

ये परिभाषित विकास हैं?

या जीवन का अभिशाप हैं?

चलिए इस पर विचार करें,

कुछ संभावित  उपचार करें|