बात

in poems

बात निकली है तो,

बात पे बात निकलेगी।

बीती बातों की पूरी,

बारात निकलेगी।

शिकवा उनको भी है,

शिकायत हमको भी है।

बढ़ेगी जो बात तो,

आंखों से बरसात निकलेगी

भावों के पत्ते तो,

झड़ ही गये।

हो दिल में बची आस,

तो मुलाकात निकलेगी।