बरखा रानी

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बरखा रानी तेरा पानी,

हर मन को हरषाता।

तेरा आना उमड़ घुमड़ कर,

तन पुलकित हो जाता।

बरखा बोली, ‘धरती रानी’,

तेरा जीवन,मेरा पानी,

फिर क्यूं व्यर्थ बहाती,

ज्यादा बरसूं, कद्र नहीं,

कम बरसूं, तो सब्र नहीं।