ध्वनियां

in poems

अक्सर हम वो सुन नहीं पाते,

जो ये दुनिया कहती हैं।

और कभी हम बिना कहे भी,

बहुत कुछ सुन जाते है।

वे ध्वनियां जो ध्वनित नहीं हो,

ज्यादा शोर मचाती है।

दिन का चैन उड़ा देती हैं,

रातों को जगाती हैं।