देश का चौकीदार

in poems

🔥 आग में तपकर ही सोना भी,

अपना मूल्य बताता है।

तेज धार पर घिस घिसकर ही,

हीरा चमक दिखाता है।

जीवन भी कुछ ऐसा ही है।

जो हमको ये सिखाता है,

संघर्ष आंच में तपकर मानव,

उच्च शिखर पर जाता है।

देश का सेवक बनकर जो,

जनकल्याण कर पाता है।

तभी तो ‘चौकीदार’ भी,

देश का दिल बन जाता है।