नारी

in poems

परिभाषित हो प्रेम,

जहां पर,

भावों से परिपूर्ण वहां पर,

तुम मिलती हो।

प्रासंगिक हो,

जब करुणा का सार,

वहां पर, तुम मिलती हो।

स्पंदित हो,हर जीवन में प्राण,

जहां पर तुम बसती हो।