राम के ईश्वरीय गुण

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राम का जन्म एक राज कुमार के रूप में हुआ, जब उनका राजतिलक होना था, उसी समय घटनाक्रम कुछ ऐसे बदले की उन्हें पत्नी के साथ जंगल में जाकर रहना पड़ा| जहाँ उनकी पत्नी का अपहरण भी हो गया और पत्नी को मुक्त कराने के लिए उन्हें युद्ध भी लड़ना पड़ा । फिर जब पत्नी को लेकर अयोध्या लौटे, तो कुछ राजनीतिक दबावों के चलते उन्हें अपनी पत्नी की अग्नि परीक्षा लेनी पड़ी। इस सबके बावजूद एक बार फिर बदलते घटनाक्रम और राजनीतिक हालात के चलते उन्हें फिर से सीता को जंगल में भेजना पड़ा, जो गर्भवती थी। जहाँँ उन्होंने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। यह जाने बिना की लव-कुश राम के अपने बच्चे हैं, राम ने अनजाने में ही उनसे युद्ध लड़ा, लेकिन सौभाग्य से लव कुश युद्ध में बच गए। इसके बाद राम का मुख देखे बिना ही सीता ने जंगल में ही प्राण त्याग दिए ।

क्या इसे आप राम का सफल जीवन कहेंगे ? सामान्य लोगों के जीवन में ऐसी घटनाएं हो, तो लोग मानसिक संतुलन ही खो देंगे, लेकिन राम ने हमेशा अपने सुख से ऊपर लोक कल्याण को रखा ।

दुनिया आप के ऊपर क्या उछालेगी, ये आपके हाथ में नहीं, लेकिन आप उन परिस्थितियों को क्या बनाते हैं, यह सौ  प्रतिशत आपके ऊपर है।

यदि विपरीत हालात में भी आप संतुलन खोए बिना अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं, तो यह गुण पूजने योग्य है, और हम राम के इन्हीं गुणों की पूजा करते हैं, उन्हें भगवान मानते हैं, क्योंकि पूरे जीवन विपरीत परिस्थितियों में संतुलित रहकर लोक कल्याण के लिए काम करना किसी सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं। असंभव को संभव में रूपांतरित करना ही ईश्वरीय गुण हैं