स्वर्णिम स्मृतियाँ

in poems

फूलो कि मुस्कान ?
तितलियों की उड़ान?
सुबह की ठहरी हुई ,
ओस की शीतल छुअन ?
या ईश्वर की निर्माणकला की ,
संगीतमय धड़कन?
तुम्हारे साथ बिताये पलो को,
क्या नाम दूँ ?
ये स्वर्णिम स्मृतियों की बाते है,
जब शब्द मौन, और
अश्रु मुखरित हो जाते है ।