मानवता

in poems

निज सुखो की मरीचिका में, खो न जाना,
जीवन बदलता है यहाँ,
ये भूल न जाना,
फूल है जीवन में ग़र,
तो शूल भी है,
चूर मत हो गर्व में,
क्योंकि यहाँ पर धूल भी है,
धूसरित हो जाएँगी,
वो गर्व की आँधियाँ नशीली,
हौसला दे तू उन्हें बढ़कर,
जिनकी हुई है आँखे गीली  ।