पिता की सीख

in poems

जब जन्म लिया इन्सां बन कर,

इंसानों जैसे जी तो लो,

कुछ दुःख के काँटें कम कर लो,

कुछ सुख के फूल खिला तो लो,

किसका ऐसा जीवन होगा,

जिससे कोई न भूल हुई,

जीवन पथ पर चलते चलते,

पथ में कोई न शूल हुई,

काँटों से ही तो सीखा है,

संभलना और संवर जाना,

नव पुष्पों की प्रतीक्षा में,

थोड़ा सा ठहर जाना।