दोस्त

in poems

रूठने पर तुम हमको मनाया करो,

बात अपने दिल की सुनाया करो,

तुम्हारी खन खन हँसी ही मेरा गीत है,

तेरे जीवन की धुन ही मेरा मीत है,

चोट अपनी न हमसे छिपाया करो,

बात जो भी हो, वो तुम बताया करो,

माना कि कुछ ना कहना बड़ी बात है,

पर दर्द की दवा न करना, स्वयं से घात है।

हों आँख में आँसू और चेहरे पे हँसी,

ऐसे दृश्यों से मुझे न भरमाया करो,

बात हो भी बहुत, बात कुछ भी नहीं,

ऐसे कह कर न, हमको बहलाया करो,

मेरे गीतों में तुम, आया जाया करो।